
मक्खन जैसी भाभी ह तु चेहरा ह कमाल का
अदा पे तेरी मर गया भाभी बनना राजस्थान का
मक्खन जैसी ...
थारी किशमिश जैसी आंख्या थारा होंठ काजु री फाँक्या
थारी पिस्ता जैसी गरदन अखरोट जैसा माथा
थार दिल के अन्दर भाभी बाग लगा दूं बादाम का
मक्खन जैसी ....
गाला ऊपर थार जद उड़ उड बैठ मांखी
हुंव ईर्ष्या म्हान म्हें बात केवा हां सांची
थार घर के आगे चौकीदार बैठा दूं नेपाल का
मक्खन जैसी ...
भर तावड़ निकल जद तुं पड़ जासी काली
तब पहरास्या बुर्को आगे मखमल की जाली
तूं कहे तो भाभी म्हारीं राग सुणा ढूं मल्लार मा
मक्खन जैसी...
मक्खन जैसी भाभी
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