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कलयुग रा ऐ संत रंगीला कथा केवे अलबेली

मुँह में राम बगल में छूरी नित नई बनाव चेली

दिन म चेली रात म छैली संत बडा रंगीला

धर्म का दे उपदेश रात में काम कर जोशीला

कलयुग रा ...

कोई योगी कोई बापु कोई बणगयो सांई

देख सुन्दर नारी न संता तुरन्त आँख छपकाई

कलयुग रा ....

धर्म कर्म न कर दिया आगे ऐसी लुट मचाई

दुनिया आ न समझ ना पाई - करी ह खूब कमाई

कलयुग रा ....

धन भी कब्जें नारी कबजे ढोंग रच्या पाखंड का

आ र बाप रो कांई जाव खा-खा हुया मूसंडा

कलयुग रा ...

दिन योगी रात में भोगी काम नहीं सता का

धर्म री ऐसी नाव डुबाई रो रही थाने जनता

कलयुग रा ...

आकाश में थान बैठाया काम करया थे खोटा

कानून री जद मार पड़ी है लेकर भाग्या लोटा

कलयुग रा ....

Kalyugi Sant
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